दोहा : दूंधाला दुख भंजना सदा उजाला भेस
सारा पहली सुंमरियों गौरी पुत्र गणेश

मेरा विघ्न हरो महाराज, मनाउ में आज
गजानंद प्यारा, गिरिजा के लाल दुलारा........

पहले मैं तुझे मनाता,
फिर ध्याऊ शारदा माता
मेरे कंठ पे आय विराजो हंसअसवारा
गिरिजा के लाल दुलारा........

थारे सोए मुकुट हजारी
थारे रिद्धि सिद्धि आज्ञाकारी
थे सब देवन सरताज करौ निसतारा
गिरिजा के लाल दुलारा ........
 
थाँर सोए दूंध दूंधाला
और गले वैजयंती माला
थारे एकदंत और सूंड शोए भुज चारा
गिरिजा के लाल दुलारा........

सब भक्त तुझे यह मनावे
तेरे चरणों में शीश नवावे
मेरी नैया पड़ी मझधार करो भवपारा
गिरिजा के लाल दुलारा........

संकलन: पवन लाहोटी