तर्ज- सपने में सखी देखयो नंद गोपाल


रुणिचे में मिलग्यो बाबो द्वारका रो नाथ
लीलो घोड़ो हाथ में भालों, नाम रामदेव पीर,रुणिचा में......

मिश्री रो जद लूण बतायो,देख बाणीये ने हुयो पछतावो
आकर थांसू माफी मांगी बाबा,आकर माफी मांगी
थे जद माफी दिन्ही बाबा,लुण बण्यो मिश्री,रुणिचे......

आंधान थे दिन्ही आंख्या 2
दिया पांगलिया ने पांव रे,बाबा वोतो आवे पालो थांरे द्वारे
दी गुंगा ने जद थे वाणी 2
बोले खम्मा वो घणी,रुणिचे में......

विदेश छोड़कर बाण्यो बोयतो-2
माल भेलो कर लायो बाबा वोतो हार लिले तांही लायो
रस्ते में जद बदली नीति -2
जहाज डूबण लागी,रुणिचे में......

रुणिचे में मिलग्यो बाबो द्वारका रो नाथ
लीलो घोड़ो हाथ में भालों, नाम रामदेव पीर,रुणिचा में......

रचयिता - पवन लाहोटी